यह कहानी है एक छोटे से गाँव की, जहाँ प्रकृति और मानव का साथ बहुत गहरा था। गाँव का नाम था "सुखपुर"। सुखपुर गाँव हरियाली से भरपूर था, जहाँ चारों तरफ हरे-भरे खेत, ऊँचे पेड़ और नदियों की मधुर ध्वनि थी। गाँव के लोग सादगी से जीवन जीते थे और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देते थे।
गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था, जिसका नाम था रामलाल। रामलाल अपनी छोटी सी झोपड़ी में रहता था और अपने खेतों में मेहनत करके अपना जीवन यापन करता था। उसके पास एक बैल था, जिसका नाम था मोटू। मोटू रामलाल का सबसे बड़ा सहारा था। वह उसके साथ खेत जोतता, बोझ ढोता और हर काम में उसकी मदद करता था। रामलाल और मोटू का रिश्ता सिर्फ मालिक और जानवर का नहीं था, बल्कि वे एक-दूसरे के सच्चे दोस्त थे।
एक दिन की बात है, रामलाल सुबह-सुबह उठा और मोटू को लेकर खेत की तरफ चल दिया। उस दिन उसने गेहूं की बुआई करनी थी। खेत में पहुँचकर रामलाल ने मोटू को हल में जोत दिया और खुद हल पकड़कर बुआई शुरू कर दी। काम करते-करते दोपहर हो गई। सूरज आसमान में चमक रहा था और गर्मी बढ़ती जा रही थी। रामलाल ने मोटू को आराम करने के लिए छाया में बांध दिया और खुद एक पेड़ के नीचे बैठकर अपना दोपहर का भोजन करने लगा।
भोजन करते समय रामलाल ने देखा कि मोटू बहुत थका हुआ लग रहा है। उसकी आँखों में थकान और दर्द साफ झलक रहा था। रामलाल को मोटू पर तरस आ गया। उसने सोचा, "मोटू ने आज बहुत मेहनत की है। मुझे इसे आराम देना चाहिए।" उसने मोटू को खोल दिया और उसे पास की नदी पर पानी पीने के लिए ले गया। नदी का ठंडा पानी पीकर मोटू को थोड़ी राहत मिली। रामलाल ने उसे वहीं छोड़ दिया और खुद वापस खेत में काम करने लगा।
शाम होते-होते रामलाल ने अपना काम पूरा कर लिया। वह मोटू को लेने नदी की तरफ गया, लेकिन वहाँ मोटू नहीं था। रामलाल ने चारों तरफ देखा, लेकिन मोटू का कहीं पता नहीं था। उसने गाँव वालों से पूछा, लेकिन किसी ने मोटू को नहीं देखा था। रामलाल बहुत परेशान हो गया। मोटू उसके लिए सिर्फ एक बैल नहीं था, बल्कि उसका सच्चा दोस्त था। उसके बिना उसका जीवन अधूरा लगने लगा।
रामलाल ने मोटू को ढूंढने का फैसला किया। वह गाँव के चारों तरफ घूमा, जंगल में गया, नदी के किनारे-किनारे चला, लेकिन मोटू का कहीं पता नहीं चला। रात हो गई और रामलाल थककर चूर हो गया। वह निराश होकर घर लौट आया। उस रात उसे नींद नहीं आई। वह बार-बार मोटू के बारे में सोचता रहा और उसकी चिंता करता रहा।
अगले दिन सुबह होते ही रामलाल फिर मोटू को ढूंढने निकल पड़ा। इस बार वह गाँव से दूर एक पहाड़ी इलाके में गया। वहाँ उसने एक बूढ़े साधु को देखा, जो एक पेड़ के नीचे ध्यान लगाए बैठा था। रामलाल ने साधु के पास जाकर उसे प्रणाम किया और अपनी समस्या बताई। साधु ने आँखें खोलीं और रामलाल को देखा। उसने कहा, "बेटा, तुम्हारा बैल तुम्हारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, है ना?"
रामलाल ने सिर हिलाया और कहा, "हाँ, बाबा। मोटू मेरा सबसे बड़ा सहारा है। उसके बिना मैं अधूरा हूँ।"
साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारी मेहनत और तुम्हारे प्रेम ने मोटू को तुमसे जोड़ा है। वह तुम्हारे पास लौट आएगा। लेकिन तुम्हें एक काम करना होगा।"
रामलाल ने उत्सुकता से पूछा, "क्या काम, बाबा?"
साधु ने कहा, "तुम्हें अपने दिल से सच्चा प्रेम और विश्वास रखना होगा। मोटू को ढूंढने के लिए तुम्हें अपने अंदर की शक्ति को पहचानना होगा। जाओ, और उसे ढूंढो। वह तुम्हारे पास लौट आएगा।"
रामलाल ने साधु के चरण छुए और उसकी बातों पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ गया। वह पहाड़ी इलाके में गहराई तक गया, जहाँ घने जंगल और ऊँचे पेड़ थे। वह मोटू को पुकारता रहा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। थककर चूर होने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। उसने सोचा, "मोटू मेरा सच्चा दोस्त है। वह मुझे छोड़कर नहीं जाएगा।"
अचानक, उसे दूर से एक आवाज़ सुनाई दी। वह आवाज़ मोटू की थी। रामलाल ने उस दिशा में दौड़ लगाई और देखा कि मोटू एक गहरी खाई में फंसा हुआ है। वह खाई से बाहर नहीं निकल पा रहा था। रामलाल ने तुरंत एक लंबी रस्सी ढूंढी और मोटू को बाहर निकालने की कोशिश की। काफी मेहनत के बाद वह मोटू को खाई से बाहर निकालने में सफल हो गया।
मोटू को देखकर रामलाल की आँखों में आँसू आ गए। उसने मोटू को गले लगाया और कहा, "मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगा, मोटू। तुम मेरे सच्चे दोस्त हो।"
मोटू ने भी रामलाल की तरफ देखा और उसकी आँखों में प्यार और विश्वास झलक रहा था। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और वापस गाँव की तरफ चल पड़े।
गाँव पहुँचकर रामलाल ने मोटू को अच्छे से खिलाया-पिलाया और उसकी देखभाल की। उस दिन के बाद रामलाल ने कभी भी मोटू को अकेला नहीं छोड़ा। वह हमेशा उसके साथ रहता और उसकी हर जरूरत का ध्यान रखता। मोटू भी रामलाल के प्रति वफादार रहा और उसके हर काम में उसकी मदद करता रहा।
इस घटना के बाद रामलाल और मोटू का रिश्ता और भी मजबूत हो गया। गाँव वालों ने भी उनकी दोस्ती को देखकर सीख ली कि सच्चा प्रेम और विश्वास ही हर रिश्ते को मजबूत बनाता है। रामलाल और मोटू की कहानी गाँव में मशहूर हो गई और लोगों ने उनकी दोस्ती को हमेशा याद रखा।
इस तरह, सुखपुर गाँव में रामलाल और मोटू की दोस्ती की कहानी हमेशा के लिए अमर हो गई। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम और विश्वास ही हर मुश्किल को आसान बना सकता है और हर रिश्ते को मजबूत बना सकता है।
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